Friday, June 21, 2019

कविता




    एक कविता 

आंखों में आंसुओं का उमड़ता सैलाब ले चले ।
यादों का सीने में छुपाकर आफताब ले चले

 गुजारे हसीन पल जिंदगी का सरमाया है मेरी 
बांध कर संग अपने ये पल हम जनाब ले चल।

पढ़ते रहेंगे हम जिंदगी के इस हसीन सफर में
संगअपनेजो तुम्हारी यादों की किताब ले चले

उम्र भर संभाल कर रखेगें दिल की तिजोरी में
हम इस महफ़िल से जो रंग और शबाब ले चले

दाने पानी का खेल है या  किरदार की जरूरत
कुछ सुलगते सवाल और  कुछ जबाब ले चले

महका करेगी मेरी हर बज़्म इसकी खुशबू से ।
तुम्हारी यादों का संग अपने जो गुलाब ले चले

हम बच्चों के बस्तों में ढूंढते रहेंगे पूरा होने तक
कुछ आधे अधूरे जो संग अपने  ख्वाब ले चले

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