[1]
बिन बच्चों के
लगता सुनसान
घर मकान |
[2]
खुश थी रात
यादों की बरसात
तुम्हारा साथ |
[3]
उदास मन
सूना –सूना आँगन
तुम्हारे बिन |
[4]
अपूर्व थाती
अँधेरे से बचाती
किताबें साथी |
[5]
हवाएं चलीं
फिर याद आ गई
सहमी कलि |
[6]
तुम्हारी याद
गरमाती बदन
जाड़े की धूप |
[7]
जिसने छीना
मजदूर का पसीना
मुश्किल जीना |
अशोक 'दर्द'
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