सतीत्व के लिए अग्नि
परीक्षा|
निर्वासन और वनवास
है नियति ||
मर्यादाओं की जंजीरों
में बन्ध ,
जीवन ढोना लाश है
नियति |
ऊँची पदवी महज़
किताबी ,
जीना बनकर दास है
नियति |
कट कर पेट में
चिन्दी-चिन्दी ,
सहना क्रूर अट्टहास
है नियति |
अस्तित्व की जमीं
लुटाना ,
मुट्ठी भर आकाश है
नियति |
जल्मो-सितम सब चुप
हो सहना ,
इधर-उधर प्रवास है
नियति |
अहिल्या जैसी मूक
शिला को ,
राम-आगमन की आस है
नियति |
जग को जीवन देना फिर
भी ,
नित-नित नव उपहास है
नियति |
अशोक दर्द
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