राह
चलते मुस्कुरा गया कोई |
ठंडें
पानी में आग लगा गया कोई ||
कदम
रिन्द हुए और बहकने लगे |
आँखों
से इतनी पिला गया कोई ||
प्यार
का शोला फिर से सुलग उठा |
भींचकर
सीने से लगा गया कोई ||
दिल
अवारा बच्चों सा मचलने लगा |
दिल का
खिलौना हाथ में पकड़ा गया कोई ||
अंधेरी रात दिल की फिर रौशन हो उठी |
दिया मुहब्बत का दिल में जला गया कोई
||
बन्द आँखों में भी अब वो ही नज़र आयें
|
पुतलियों पे अपनी तस्वीर जो बना गया
कोई ||
अशोक
दर्द
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